आमतौर पर युवा माता - पिता जिनके बच्चे छोटे हैं या अनजाने में एक छोटी से गलती करते हैं जो बड़ा रूप ले सकती है। अक्सर देखा गया है जब दो या दो से ज्यादा बच्चे होते हैं तो किसी एक बच्चे पर थोड़ा अधिक स्नेह होता है जिस कारण अन्य बच्चे की थोड़ी से अनदेखी भी उसके मन-मस्तिष्क पर असर कर जाती है। कभी बिना गलती एक को डांट दिया और दूसरे को प्रेम से समझा दिया इस तरह की मामूली सी गलती अक्सर सभी माता पिता से हो जाती है जो की वो स्वयं भी जान नही पाते। इस तरह की गलती जीवन की किसी भी पड़ाव में हो सकती है जो की माता पिता जान नही पाते पर बच्चे के मस्तिष्क पर ये बड़ा असर करती है जोकि बच्चे के बड़े होने के साथ साथ गंभीर होती जाती है।
धृतराष्ट्र 99 पुत्रों को अनदेखा कर सिर्फ कपटी स्वभाव वाले दुर्योधन के मोह में डूबे रहे जिस कारण महाभारत हुई और उनका सर्वस्व विनाश हो गया। धृतराष्ट्र जैसी गलती जीवन के किसी भी पड़ाव में हो सकती है इस समस्या का निवारण भी यही है कि अगर आप माता पिता है तो आत्मचिंतन करें कि कहीं आपसे इस तरह की कोई गलती तो नहीं हो रही है। कई माता-पिता यहां पर तर्क देंगे कि माँ बाप के लिए सभी बच्चे समान होते हैं। मैं भी मानता हूँ कि माँ बाप के लिए सभी बच्चे समान होते हैं इसीलिए मै बार बार कह रहा हूँ कि 90 प्रतिशत माता पिता से ऐसी गलतियां अनजाने में होती हैं, 10 प्रतिशत माता पिता सब जानते हुवे भी अनजान बने रहते हैं। यह भी देखा गया है कि कम बोलने वाला बच्चा कभी अपनी बात सही से रख नही पाता और मन मारकर बैठ जाता है, खैर।
ये बात तो हो गई माता पिता की परन्तु ऐसा नही है कि गलती सिर्फ माता पिता की ही हो। कई बार बच्चों से भी गलतियां होती है और ये अक्सर परिवार बढ़ने के साथ शुरू होती हैं जब माता पिता बुजुर्ग हो जाते हैं, बच्चों का विवाह होने के बाद सब अपने और पत्नी बच्चों के बारे में अधिक स्नेह रखते हैं, हालाँकि माता पिता के लिए उनका प्रेम कभी कम नही होता। सास बहू के मतभेद भी लड़कों को झेलने पड़ते हैं।
संयुक्त परिवार में जब एक बहू रसोई में सबको पराठे का नाश्ता दे रही है और उसके मन में विचार आता है कि अपने पति को या अपने बच्चे को थोड़ा अच्छा पराठा सेक कर दे दूं। बस इसी क्षण मतभेद की नींव पड़ जाती है। विचार शब्दों में बदल जाते हैं फिर शब्द बातचीत में और बातचीतों से मतभेद आरम्भ हो जाते हैं। सभी को प्रयास करना चाहिए कि ऐसे विचार मन में आते ही उसे तुरंत दिमाग से निकाल दें।
बुजुर्ग माता पिता को बेटा बहू और पोता पोतियों की तुलना करने से बचना चाहिए साथ ही बेटा बहू की भी जिम्मेदारी बनती है कि अपने बच्चों की तुलना घर के अन्य बच्चों से ना करे।
चापलूसी स्वभाव की पहचान: प्रत्येक घर में कुछ सदस्य ऐसे अवश्य होते हैं जिनका स्वभाव चापलूसी का होता है, घर के मुखिया को इसे पहचान कर सतर्क रहे क्योंकि इसका सीधा असर अन्य लोगों के साथ के रिश्तों पर पड़ता है।
गिनती हमेशा एक से शुरू होती है इस जल्दी ना रोक जाये तो हालात बहुत जल्दी बिगड़ने लगते हैं, बिलकुल कोरोना वायरस की बीमारी की तरह। घर का वातावरण खुशमय बनाये रखने के लिये बहुत सी बातों का ध्यान रखना चाहिए
🔸यदि आप घर में छोटे हैं तो बड़ों को सम्मान देने में लापरवाही ना करें।
🔸यदि आप बड़े हैं तो छोटों को बराबर स्नेह देवें।
🔸धृतराष्ट्र की तरह किसी एक पुत्र के मोह में अंधे ना बने, इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
🔸घर जे सभी सदस्य घर के सभी छोटे बच्चों को बराबर स्नेह देवें। तुलना ना करें, इससे बच्चों में हीन भावना जन्म लेती है।
🔸किसी सदस्य की कोई बात ठीक नही लगी हो तो सीधे उससे पूछकर बात को क्लियर करना चाहिए। सुनी सुनाई बातों को सच ना मानें।
🔸इन-डायरेक्ट रूप से सोशल मीडिया पर घर के किसी सदस्य पर तंज ना कसें। सभी समझदार हैं बातों का अर्थ निकालने में समय नही लगता।
🔸कोरोना वायरस की बीमारी से ये तो समझ गए होंगे की जीवन का कोई भरोसा नही कब अंत समय आ जाये तो फिर मतभेद मिटाकर प्रेम से रहें।
🔸छोटी छोटी बातों को नजरअंदाज करना सीखें।
🔸संयुक्त परिवार में हैं तो कुछ भी पृथक से करने या कुछ छिपाने के विचार बड़ी तबाही कर देते हैं, इससे बचें।
अंत में यही कि मैं कोई लेखक नही हूँ सिर्फ अपने विचार लिखने का प्रयास किया है। कही कोई त्रुटि हो तो क्षमा करें।
..मिलते हैं फिर से...✍️